राजा का प्रश्न और किसान का आईना
एक बार एक राजा के मन में कौतुहल उठा कि दुनिया में ऐसी कौन सी वस्तु है जिसकी पराकाष्ठा या सीमा नहीं है। राजा ने अपने दरबार में यह प्रश्न दरबारियों के सम्मुख रखा और साथ में यह भी हिदायत दी कि तर्क देने वाले व्यक्ति को उसके तर्क को साबित करने के लिए प्रमाण भी देना होगा। और यह प्रमाण ऐसा होना चाहिए जिससे राजा के साथ-साथ अन्य सभी व्यक्ति भी उस प्रमाण और तर्क के सहमत हो सके। जो व्यक्ति इस प्रश्न का सही-सही जवाब प्रस्तुत कर पायेगा उससे बहुत ढेर सारा पुरस्कार दिया जायेगा और जो असफल होता है उसे मृत्युदंड दिया जाएगा। प्रश्न तो सभी व्यक्तियों को आसान लगा और उन्हें लगा कि वे उसका बेहतर जानते है परन्तु मृत्युदंड के भय के कारण कोई भी व्यक्ति उत्तर देने कि हिम्मत नहीं जूता पाया। राजा अत्यंत चिंता में पड़ गया और इसके लिए उसने १ हफ्ते का समय भी दिया। राजदरबार से बाहर निकलकर सभी अपनी-अपनी राय देने लगे मसलन कोई बुद्धि, कोई धन, ज्ञान, ईश्वर और कोई वीरता आदि को श्रेष्ठ बताने में लगा था। ऐसे विमर्श का कोई भी निश्चित हल निकल पाना प्रायः असंभव होता है। और प्रमाण तो और भी मुश्किल है। उड़ते-उड़ते यह बात उस नगर के ...