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Showing posts from March, 2026
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  अक्स-ए-सफर (सफर की परछाई) दिया सूरज को दिखलाने में लगे है,  चंद कुछ लोग मुझको आजमाने में लगे है।  कभी करते थे जो बातें हमेशा साथ देने की,  वही कुछ लोग अब आँखें दिखाने में लगे है।  भुला बैठे है शायद की किसकी कोशिशों से पायी है मंजिल,  मेरे कुछ दोस्त मुझको समझाने में लगे है।  मेरी मंजिल अभी है दूर और फासला लम्बा,  कहाँ समझेंगे वो लोग जो बातें बनाने में लगे है।  कभी उन्मीद रखी जो तो बेमानी हुई साबित,  है कुछ लोग ऐसे भी जो नजरें चुराने में लगे है।  शहर में बिजलियाँ कड़की और मेरा घर था शीशे का,  कहाँ मंसूबा था के लोग अब पत्थर उठाने में लगे है।  भले ही कोशिशें कर ले आंधियां आज़माइश की,  मगर हम भी है जिद में चरागों को जलाने में लगे है।  भटक जाने के डर से वो कहाँ मंजिल को निकले थे,  सुना ही लोग ऐसे अब रास्ता दिखाने में लगे है।।  
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  वक्त की बेरुखी बिछड़ के मुझसे मुझे याद तो करती होगी, शिकायत रब से या फरियाद भी करती होगी।  लिखा था नाम मेरा मेहँदी से हथेली पे उसने एक बार, मगर अब माँग में सिन्दूर किसी और का भरती होगी।  जुदा होने से पहले इस कदर लिपट कर मुझसे रोई थी  बिछड़ के मुझसे रहती है मगर हर रोज तो मरती होगी। जिंदगी तनहा हो और लम्बी भी तो अक्सर बोझ लगती है क्या सावन आने से अब भी वो वैसे ही डरती होगी। खुला रखा है इसी उन्मीद से मैंने घर का दरवाजा,  कभी इक रोज तो वो भी इस रस्ते से गुजरती होगी।।
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शीशे के घर और हब्तूर के पत्थर: अमेरिका को नसीहत देने चले अरबपति की पोल-खोल। कहावत है कि काबुल में गधे नहीं पाए जाते। अगर इसके शाब्दिक अर्थ (लिटरल मीनिंग) को दरकिनार कर के देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि काबुल में भले ही गधे नहीं पाए जाते हो मगर कुछ देश ऐसे भी है जहाँ ऐसे लोगों की एक बड़ी खेप मौजूद है। हालिया ईरान बनाम इसराइल और अमेरिका की घटनाओं को देख कर इस बात पर यकीन करना बहुत ही आसान हो जाता है। अब UAE के प्रमुख उद्योगपतियों में से एक अरबपति खलफ़ अहमद अल हब्तूर के बयान को ही ले लीजिये। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लिखे एक एक खुले पत्र में इस उद्योगपति ने जो सवाल उठाये है उसे पढ़ कर यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि हब्तूर मियां यह सब एक सस्ती पब्लिसिटी के लिए कर रहे है। हालाँकि उनके ट्रम्प पर दागे गए सवालों को सुनकर मैं खुद को रोक नहीं पाया और उनके जवाब मैंने खुद से देने की ठानी। हाँ ये बात और है कि न तो मेरा ट्रम्प से कुछ लेना देना है और न ही हब्तूर साहब से। हब्तूर साहब ने पहला प्रश्न ये पूछा है कि "आपको हमारे इलाके को ईरान के साथ जंग में घसीटने का अधिकार किसने द...